Monday, 2 June 2014

जवाब की तलाश में (लघु कथा )

   सहमी सी मौत के कारण वो यमराज के पास  वो ऐसे ही पहुँची, कपड़ों का  हाल बुरा था, चेहरे पर बर्बरता के निशान थे। यमराज के साथ चित्रगुप्त भी  हैरान था। क्योंकि ऐसा पहली बार हुआ था कि कोई यमलोक को देखकर चिखे चिल्लाएं न।
आखिर इस बच्ची के साथ क्या हुआ है चित्रगुप्त, यमराज ने सवाल किया
-चित्रगुप्त ने मानवजीवन    बहीखाते की ओर नजर डाली और तलाशने लगे उस बच्ची के अतीत के बारे में थोडी देर के बाद चित्रगुप्त ने कहा कि महाराज इस बच्ची के साथ बहुत गलत हुआ है। इसकी असमत  लूटी गई है।
एकाएक वो चींख पडी , नहीं ...नहीं
असमत   मेरी नहींं.  उन माओं की तार तार हुई हैं जिनकी कोंख ने नौ महीने तक उन बाशिंदों को जगह दी। असमत  मेरी नहीं ...उस बाप की लूटी है जो सोचता था कि अपनी बिटिया को अफसर बनाऐगा। क्या दोष था मेरा ? यमराज अफसोस में था।
क्या तुम केवल देखने के लिए बैठे हो? उसने यमराज से पूछा
लोग आपकी जमात के कुछ को देवी देवता कहते है ,पूजा करते है आपकी , आस रखते है आप जैसे देवी देवताओं से
लेकिन आप अनादर करते है.
हमें यहां स्वर्ग नहीं चाहिए बस आप धरती को स्वर्ग बना दीजिए । आप क्यों भेजते है बेटियों को वहां ... क्यों भेजते है आप.…  वो रो पडीÞ,, बहुत दर्द   देते है हमें लोग.. कहीं आप इसलिए तो नहीं भेजते कि आप ही जैसी मर्द जात उसका लुत्फ उठा सकें?
यमराज उस दिन से उत्तर के लिए भटक रहा हैं और वो आज भी  जवाब के इंतजार में हैं

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