जैसे ही मीना ने उसे फ़ोन कर बताया कि शीतल वो तेरी याद में आज भी परेशान है'बस एक बार उससे बात कर लो । उसका नाम सुनते ही शीतल सिहर गई'बदन से कंपकपी सी छुटने लगी' ऐसा लगा जैसे किसी के सपर्श ने उसके अक्षत बदन को छु लिया हो।शीतल के समक्षसारी बातें एक दृष्य की तरह चलने लगी। अब वो भी परेशान ' लेकिन खिड़की से नाना जी को अपने कमरे की ओर बढ़ते देखा तो सब भूल गई
उसने मीना को शीघ्रता से कहा'आप फ़ोन रख दीजिये'कुछ नही हो सकता'हम उससे बात नही कर सकते'सब रास्ते बंद हो चुके है' बहुत बुरा हो जायेगा
इतने वाक्य वो एक साथ तपाक से बोल गई ठीक पागलों की तरह
मीना कुछ ना बोली शिष्ठाचार के तहत फ़ोन रख दिया।
फ़ोन कटते ही शीतल सोच में'मीना भी उसी बोध मे
थोड़ी देर बाद मीना ने प्रियदर्शन को फ़ोन किया और सारी बात बता दी' सहसा वो भी सहम गया ' उसकी चश्म ठहर गई
तीनो के कानो में फ़ोन कटने की वो आवाज़ थी' आसपास सुनसान' कुछ प्रशन तॆनात थे' समृति के कुछ चित्र आज जैसे किसी तिराहे (तीन रास्ते) पर पड़े हो
(बेदखल आशिक)ं
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