Thursday, 7 November 2013

घर की दिवाली

मेरे कुछ दोस्त इस त्यौहार पर घर भी नही जा पाए।उनको बस यही कहना चाहता हूँ की माँ बापू जी तुम्हरे पास ही है बस आंखे बंद करो और देखो मन की आँखों से तुम हो अपने घर जहा माँ पकवान बना रही हैं।तुम नये कपड़े पहन रहे हों छोटा भाई/बहन तुम्हे देख रहा हैं ऐसे जैसे कोई हीरो तयार हो रहा हो।लो बापू जी/पापा आ गए तुम्हरी मनपसंद मिठाई लेकर।अब बस पूजा करो और मिठाई खाओ।तू देल्ली नही बस मन की आखों से घर चले आओ
अगर कुछ गलत लिखा हो तो माफ़ करना।
        दिवाली की शुभकामनायें

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