लट्टर (आवारा)
इन हाथों को देखकर कुछ याद आया कभी हम भी इस सफ़र में किसी के साथ हुआ करते थे अब ना जाने क्यों लगता हैं कही खो गया वो हाथ लेकिन महसूस करता हूँ सिर पर ताज की तरह आज भी वो हाथ
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