एअरपोर्ट पर खड़ाआंखे खोलने पर एक बाप को देखा।लोगो की आंखे गडी हुई थी उस अलदीन के दरवाजे पर जहा कुछ लोग बहुत खुश थे। वही कुछ आँखों में दूरी थी जो जल्द गहरी होने वाली थी
अपनी बच्ची को एअरपोर्टछोड़ने आया वो बाप मानो ये सोच रहा हो की उसकी बेटी अब ना जाने उसके सामने कब आयेगी
वो बाप आज ये सोच रहा हैं कि बेटिया कब बड़ी हो जाती हैं पता ही नही चलता।ठीक ही कहती थी इसकी माँ की जब जाएगी ना तब देखुगी तुम्हे। आज इसकी माँ भी नही हैं और उसकी भवनाओ को समझने वाला कोई नही। किसी का कन्धा नही हैं जो मुझे थोड़ी राहत दे
और दूसरी और बेटी बाप के गले लगने वाला वो सपर्श सदेव याद रखना चाहती है।मानो वो बाप की खुशबू को अपने साथ ले जाना चाहती हों
बाप उसे जब तक देखता हैं जब तक वो ओझल नही हो जाती
बेटी का हिलता बाय बाय करता वो हाथ बाप को और विचलित करता और वो मानो ऐसा तडपता जैसे बिन जल के मछली
और बेटी बोर्डिंग के लिए चली गई
बाप की आँखों में पानी था
बेटी की आँखों में बाप का चेहरां
Thursday, 7 November 2013
एक बाप ये भी हैं
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment