2015 मेरा बहुत अच्छा दोस्त था
धीरे-धीरे चलता था
कतरे जैसा था वो
उसके कदमों की सरसराहट मैंने जाते वक़्त महसूस की
मैं जानता था वो वापस नहीं आयेगा
उसकी रवानगी के दौरान मैंने अपनी यादों की जेबों में उसके कुछ निशां समेट लिये
धीरे-धीरे चलता था
कतरे जैसा था वो
उसके कदमों की सरसराहट मैंने जाते वक़्त महसूस की
मैं जानता था वो वापस नहीं आयेगा
उसकी रवानगी के दौरान मैंने अपनी यादों की जेबों में उसके कुछ निशां समेट लिये
कल 2016 आयेगा
कुछ दिन तो मैं 2015 से ही दोस्ती रखूंगा
उसे ही याद करूंगा
2016 के सामने मैं 2015 की तारीफ़ करूंगा
2016 चिढ़ जायेगा
मैं 2015 को मिटा कर उसे मनाऊंगा
उसकी बाहें थाम कर कई राहें तय करनी हैं मुझे
डायरी से लेकर सैलरी स्लिप में वो मिलता रहेगा
हर रोज़ कम्प्यूटर की स्क्रीन पर दिखता रहेगा
कई सारे प्लान उससे जुड़ जायेंगे
एक रिश्ता सा हो जायेगा हमारा
एक दिन 2016 भी चला जायेगा
शायर उसे भी नहीं रोक पायेगा
बस उसकी याद में कविता लिख जायेगा
(प्रियोदत्त)
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