किरदार कभी मरता नहीं मंटो ने सपने में कहा मुझसे
खुशवंत सिंह की पाकिस्तान मेल (उपन्यास) का जग्गा व इकबाल भी वहां मौजूद थे
गुलज़ार की नज्में एक साफ़ चिटी(सफ़ेद) सी दीवार पर लिखी हुई थी
सूजे हुए पैरों को अपने साथ आज तक बरकरार रखें हुए
टोबा टेक सिंह उस दीवार को देखते हुए बोले जा रहा था
“ उप्पर दी गुड़-गुड़ दी मुंग दी दाल दी लालटेन
दी हिंदूस्तान ते पाकिस्तान दी दुर फिटे मुंह”
सपने से बाहर आंख खुली तो में ये भूल चुका था
कि ये कौन सा देश है
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