चिंगारी
सी जलती है इक सीने में
उसे पहले मैंने दिल की पंखी से झलना शुरू किया
फूंक भी रहा था साथ-साथ उसे
पर बेताबी के चलते ख्वाबों का सारा बचा तेल उडेल दिया
धुआं उठा, सांसों में अटकने लगा
आतिश जलाई ही थी कि
एक शख़्स अपने बरसों पुराने हाथों में जमीं तन्हाई लिए आया
सेकता रहा वो रात भर अपनी तन्हाई को
मेरे सीने में जलाता अलाव ना जाने कब उसका हो गया
(प्रियोदत्त)
उसे पहले मैंने दिल की पंखी से झलना शुरू किया
फूंक भी रहा था साथ-साथ उसे
पर बेताबी के चलते ख्वाबों का सारा बचा तेल उडेल दिया
धुआं उठा, सांसों में अटकने लगा
आतिश जलाई ही थी कि
एक शख़्स अपने बरसों पुराने हाथों में जमीं तन्हाई लिए आया
सेकता रहा वो रात भर अपनी तन्हाई को
मेरे सीने में जलाता अलाव ना जाने कब उसका हो गया
(प्रियोदत्त)