अक्सर तुम्हारे निशानें छूट जाते हैं
तुम जिस्म पर गोली मारते हो
गले को रेतते हो
अंगों को काटते हो
ऐसे कोई मरता है भला?
बताओ मुझे
मैं ऐसी मौत चाहता हूं तुमसे
जिससे मेरी रूह कांपने लगे
लोग तो आकबत से भी कांप जाते हैं
मेरे विचारों को मारो अगर मारना चाहते हो मुझे
मेरे अंदर ज़िंदा उस रोशनी को बुझा दो
मेरी कलम की स्याही को नहीं
मेरे आस-पास के हालातों को ख़त्म करो
जो मुझे किसी न किसी रूप में ज़िंदा करते रहते हैं
क्यों तुम हर बार मुझे गोली मारकर, गला रेतकर, बम से उड़ाकर
ज़िंदा करते रहते हो?
मैं चाहता हूं कि तुम जीतो
पर पहले मुझसे मुकाबला तो करो कठमुल्लों...
गले को रेतते हो
अंगों को काटते हो
ऐसे कोई मरता है भला?
बताओ मुझे
मैं ऐसी मौत चाहता हूं तुमसे
जिससे मेरी रूह कांपने लगे
लोग तो आकबत से भी कांप जाते हैं
मेरे विचारों को मारो अगर मारना चाहते हो मुझे
मेरे अंदर ज़िंदा उस रोशनी को बुझा दो
मेरी कलम की स्याही को नहीं
मेरे आस-पास के हालातों को ख़त्म करो
जो मुझे किसी न किसी रूप में ज़िंदा करते रहते हैं
क्यों तुम हर बार मुझे गोली मारकर, गला रेतकर, बम से उड़ाकर
ज़िंदा करते रहते हो?
मैं चाहता हूं कि तुम जीतो
पर पहले मुझसे मुकाबला तो करो कठमुल्लों...
(प्रियोदत्त)